Ashutosh Shashank Shekhar Shiv Stuti lyrics and meaning in Hindi

भगवान शिव, जिन्हें आशुतोष, भोलेनाथ और महादेव के नाम से जाना जाता है, हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक हैं। शिव पुराण और अन्य ग्रंथों में भगवान शिव को संहारक और कल्याणकारी दोनों रूपों में वर्णित किया गया है। महादेव की भक्ति का सबसे सरल और शक्तिशाली मार्ग है शिव स्तुति – आशुतोष शशांक शेखर (Shiv Stuti Ashutosh Shashank Shekhar) इस स्तुति के जप से न केवल शिव की कृपा प्राप्त होती है बल्कि जीवन में शांति और कल्याण भी मिलता है। तो चलिए शुरू करते हैं – हर हर महादेव

शिव स्तुति – आशुतोष शशांक शेखर हिंदी Lyrics में

अर्थ: आशुतोष (जो शीघ्र प्रसन्न होते हैं), शशांक शेखर (चन्द्र को धारण करने वाले), चन्द्रमौलि और चिदम्बररूप शिव! आपको करोड़ों-करोड़ों बार प्रणाम है, हे दिगम्बर।

अर्थ: आप निर्विकार हैं, ओंकारस्वरूप हैं और अविनाशी हैं। आप ही देवताओं के भी देव हैं। आप सृष्टि की रचना करने वाले और अंत में प्रलय करने वाले हैं। आप शिव (कल्याणकारी), सत्य और सुंदर हैं।

अर्थ: आप निराकार स्वरूप वाले कालेश्वर हैं, महान योगेश्वर हैं। आप दया और दान के सागर हैं। जटाधारी और भय को हरने वाले महादेव! आपकी जय हो।

अर्थ: आप त्रिशूल धारण करने वाले शूलपाणि हैं। सरल स्वरूप वाले हैं। त्रिनेत्रधारी महेश, काशी के विश्वनाथ और पालनहार शिव! आपकी जय हो।

अर्थ: हे नागेश्वरनाथ, आप हमारे सारे पाप, अभिशाप और अंधकार को दूर कर दीजिए। आप महादेव, महान, भोलेनाथ, सदा शिव और शंकर हैं।

अर्थ: हे जगतपति! हमारी भक्ति सदा आपके चरणों में बनी रहे। हमारे सभी अपराध क्षमा कर दीजिए। जय हो, जय हो जगदीश्वर ।

अर्थ: हमारे इस जन्म के सारे दुःख-संताप दूर हो जाएं। हमारा मन निरंतर मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करता रहे।

अर्थ: आशुतोष (जो शीघ्र प्रसन्न होते हैं), शशांक शेखर (चन्द्र को धारण करने वाले), चन्द्रमौलि और चिदम्बररूप शिव! आपको करोड़ों-करोड़ों बार प्रणाम है, हे दिगम्बर

शिव स्तुति मंत्र: रावण द्वारा रचित

Ravan Stuti Shiv lyrics in Hindi

आपको जानकर आश्चर्य होगा, लेकिन लंका के राजा रावण केवल बलशाली और विद्वान ही नहीं, बल्कि एक बहुत बड़े शिव भक्त भी थे। कहा जाता है कि रावण जब शिव जी को प्रसन्न करना चाहते थे, तब उन्होंने महादेव की स्तुति में एक अद्भुत और शक्तिशाली स्तोत्र की रचना की थी। यही स्तोत्र आज “शिव तांडव स्तोत्र” के नाम से प्रसिद्ध है।

शिव स्तुति मंत्र कब करना चाहिए?

हिन्दू धर्म में प्रत्येक मंत्र का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन कुछ अवसर और परिस्थितियाँ ऐसी होती हैं जब शिव स्तुति का जाप अत्यधिक फलदायी सिद्ध होता है।

  • प्रातःकाल स्नान के बाद शिव स्तुति का जाप करने से दिनभर मन शांत और ऊर्जावान रहता है।
  • सोमवार को, जो शिव जी का विशेष दिन माना जाता है, स्तुति का जाप करने से उनकी कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
  • संकट की घड़ी में शिव स्तुति का पाठ करने से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • विशेष अवसरों पर, जैसे कोई त्यौहार या खासकर सावन महीने में, शिव स्तुति का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

ध्यान रहे कि हिन्दू धर्म में मंत्रों का अत्यधिक महत्व है। इसलिए जब भी इनका उच्चारण करें तो शुद्धता और सही तरीके से करें। कई पाठक समय की कमी के कारण इन्हें जल्दी-जल्दी पढ़ते हैं और गलती कर बैठते हैं। धार्मिक अनुष्ठानों के अंत में प्रायः यह क्षमायाचना मंत्र पढ़ा जाता है, जिससे साधक अपने द्वारा जाने-अनजाने हुए अपराधों के लिए भगवान से क्षमा मांगता है।

अर्थ: हे महादेव! मुझसे जाने-अनजाने में दिन-रात अनेकों भूलें हो जाती हैं। मैं आपका सेवक हूँ, इसलिए कृपापूर्वक मुझे क्षमा करें। मुझे न तो ठीक से आवाहन करना आता है और न ही विसर्जन की विधि ज्ञात है। पूजा की परिपूर्ण विधि भी मैं नहीं जानता, अतः मेरे सभी दोषों को क्षमा करें।

आधुनिक जीवन में मंत्रोच्चारण का महत्व

हिंदू धर्म में मंत्रों का गहरा महत्व है। ये केवल कुछ शब्दों का मेल नहीं हैं, बल्कि हर अक्षर के पीछे एक अद्भुत शक्ति और रहस्य छिपा होता है। जब हम श्रद्धा और पवित्र भाव से मंत्रोच्चारण करते हैं, तो उसका प्रभाव सीधा हमारे मन, शरीर और आत्मा पर पड़ता है।

आधुनिक वैज्ञानिक शोध भी इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि नियमित मंत्र जाप से मन की एकाग्रता बढ़ती है, तनाव और चिंता कम होते हैं, तथा भीतर से सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार होता है।

हार्वर्ड विश्वविद्यालय (Harvard University) अमेरिका का एक विश्वप्रसिद्ध और प्राचीन शैक्षणिक संस्थान है। हार्वर्ड के Harvard Divinity School Bulletin में प्रकाशित एक शोध लेख के अनुसार, “Mantra Chanting Heals and Connects”, अर्थात मंत्रोच्चारण से न केवल शरीर और मन को शांति और सुरक्षा मिलती है, बल्कि साधक दिव्य चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा से भी जुड़ता है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

उम्मीद है कि हमारा आज का लेख “शिव स्तुति – आशुतोष शशांक शेखर एवं रावण स्तुति”, जो विशेष रूप से शिव भक्तों को समर्पित है, आपको अवश्य पसंद आया होगा। यदि यह लेख आपको अच्छा लगे तो कृपया इसे अपने मित्रों और परिचितों के साथ साझा करना न भूलें।

यह लेख हमने भक्तों के विशेष आग्रह पर प्रस्तुत किया है। ध्यान रहे, इस सामग्री को तैयार करने में गहन शोध किया गया है और विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों का सहारा लिया गया है। फिर भी यदि आपको किसी प्रकार की त्रुटि दिखाई दे, तो उसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं। आप अपने सुझाव और विचार हमें नीचे टिप्पणी में साझा कर सकते हैं।

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